गंगा एक्सप्रेसवे से कैसे बदलेगी पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश की किस्मत

उत्तर प्रदेश का और देश की सबसे लंबी एक्सप्रेस परियोजना है यह परियोजना राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगी बल्कि आर्थिक विकास के नए द्वार भी खोलेगी।

गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश में मेरठ को प्रयागराज से जोड़ने वाली 6 या 8 लेने का एक्सप्रेसवे है जो 594 किलोमीटर लंबा है यह परियोजना पश्चिमी यूपी को पूर्वी यूपी से जोड़ेगी जिससे यात्रा में कम समय लगेगा नरेंद्र मोदी ने 18 दिसंबर 2021 को शाहजहांपुर में इसकी आधारशिला रखी थी|

यह गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के 12 जिला से होकर गुजरेगा पहले इसमें है मेरठ हापुड़ बुलंदशहर अमरोहा संभल बदायूं शाहजहांपुर हरदोई उन्नाव रायबरेली प्रतापगढ़ प्रयागराज।

गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना की विशेषता इसमें आठ लेन तक बढ़ाया जा सकता है। हवाई पट्टी जिसकी लंबाई 3.5 किलोमीटर है, पुल और ओवर ब्रिज आठ बनाए गए हैं जो शाहजहांपुर में स्थित है और पीपीपी मॉडल पर आधारित है इसकी कुल लागत 36230 करोड रुपए हैं|यह एक ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे है। 2026 तक यह वाहनों के लिए खोला जाएगा।

गंगा एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी मेरठ से प्रयागराज की दूरी जो पहले 14 से 16 घंटे लगती थी। अब वह 6- 7 घंटा लगेगा। गंगा एक्सप्रेसवे के साथ औद्योगिक गडरियारे भी विकसित किए जाएंगे गंगा एक्सप्रेसवे से कृषि लाभ और पर्यटन की दृष्टि से यह बहुत महत्वपूर्ण है। यह इस एक्सप्रेसवे का दूसरा चरण बलिया तक लगभग प्रयागराज से बलिया तक 350 किलोमीटर बढ़ाया जाएगा इसके पूरा होने के बाद यह एक्सप्रेसवे 950 किलोमीटर लंबा हो जाएगा।


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