स्वच्छ पेयजल केवल एक बुनियादी आवश्यकता नहीं बल्कि यह सम्मानजनक जीवन का अधिकार है भारत जैसे विशाल देश में जहां सदियों से ग्रामीण महिलाओं का एक बड़ा हिस्सा पानी के लिए लंबी दूरी तय करने की मजबूर रहा है| इस ऐतिहासिक चुनौती को समाप्त करने के लिए 15 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीन से जल जीवन मिशन की घोषणा की थी। जल जीवन मिशन 2.0 के रूप में एक नए और अधिक शक्तिशाली अवतार हमारे सामने है।
मिशन का विस्तार 2028 तक
जल जीवन मिशन का लक्ष्य 2024 तक हर ग्राम ग्रामीण घर में नल का जल पहुंचना था। मार्च 2026 में केंद्रीय कैबिनेट में एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए इस मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने की मंजूरी दी है।
इस विस्तार को जल जीवन मिशन 2.0 सरकार का मानना है कि बुनियादी ढांचा तैयार होने के बाद अब यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उन नलों में अगले 20 से 30 वर्षों तक शुद्ध पानी निरंतर आता रहे।
बजट आर्थिक मिशन का कुल बजट अब बढ़कर 8.69 लाख करोड़ हो गया। सुजलाम भारत तकनीक और पारदर्शिता का संगम सरकार ने सुजलाम भारत नाम का एक आधुनिक अत्यधिक डिजिटल ढांचा पेश किया है यह डिजिटल इंडिया और जल शक्ति का बेहतरीन उदाहरण है। कई राज्यों में अब पानी की टंकी या पाइप लाइनों में सेंसर लगाए गए हैं जो जिला और जिला मुख्यालय को रियल टाइम डाटा भेजते हैं।
जल की गुणवत्ता और महिला सशक्तिकरण जल जीवन मिशन का एक बड़ा हिस्सा पानी की शुद्धता पर केंद्रित है प्रदूषित पानी भारत में बीमारियों का एक मुख्य कारण गांव में पानी की गुणवत्ता की जांच के लिए 24.8 लाख से अधिक महिलाओं को फील्ड टेस्टिंग किट का प्रयोग करने के लिए ट्रेनिंग दिया गया है| हर गांव में कम से कम यह काम पांच महिलाओं को यह जिम्मेदारी सौंप गई है।
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