अधिनियम 1786,चार्टर एक्ट 1793,चार्टर एक्ट 1833, चार्टर एक्ट 1853

अधिनियम, 1786 (Act of 1786)

यह कानून मुख्य रूप से लॉर्ड कॉर्नवालिस को भारत का गवर्नर जनरल बनाने और उन्हें विशेष ताकतें देने के लिए लाया गया था।

प्रश्न : किस अधिनियम के द्वारा गवर्नर जनरल को प्रधान सेनापति की शक्तियां भी प्रदान की गई थीं

उत्तर : 1786 के अधिनियम से

सरल व्याख्या : इसी कानून के जरिए भारत के गवर्नर जनरल को ही देश की पूरी ब्रिटिश सेना का सबसे बड़ा कमांडर यानी प्रधान सेनापति (Commander-in-Chief) भी बना दिया गया (यह ताकत सबसे पहले लॉर्ड कॉर्नवालिस को मिली)।

प्रश्न : गवर्नर जनरल को विशेष परिस्थितियों में अपनी परिषद के निर्णय को निरस्त करने अथवा लागू करने का अधिकार प्रदान किया गया था

उत्तर : 1786 के अधिनियम में सरल व्याख्या : इससे पहले गवर्नर जनरल अपनी 4 सदस्यों की टीम (परिषद) के फैसले को अकेले नहीं बदल सकता था। लेकिन इस कानून के बाद गवर्नर जनरल को यह विशेष वीटो पावर मिल गई कि वह किसी भी जरूरी स्थिति में अपनी ही टीम के फैसले को रद्द (निरस्त) कर सके और अपना फैसला लागू कर सके।

चार्टर एक्ट, 1793 (Charter Act of 1793)

प्रश्न : किस चार्टर के द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि गवर्नर जनरल बंगाल में अपनी अनुपस्थिति के समय परिषद के असैनिक सदस्य को अपने परिषद का उप-प्रधान नियुक्त कर सकता है

उत्तर : चार्टर अधिनियम, 1793

सरल व्याख्या : अगर गवर्नर जनरल किसी काम से बंगाल से बाहर (अनुपस्थित) जाता है, तो वह अपनी जगह परिषद के किसी भी सिविल (असैनिक) सदस्य को अस्थाई रूप से वाइस-प्रेसिडेंट या उप-प्रधान बना सकता है ताकि काम न रुके।

प्रश्न : चार्टर अधिनियम, 1793 के तहत ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारिक अधिकारों को कितने वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया

उत्तर : 20 वर्ष

सरल व्याख्या : ब्रिटिश संसद ने इस कानून के ज़रिए ईस्ट इंडिया कंपनी को अगले 20 सालों तक भारत में अकेले व्यापार करने का लाइसेंस (एकाधिकार) आगे बढ़ा दिया।

प्रश्न : किस अधिनियम के द्वारा बिना लाइसेंस के शराब की बिक्री पर रोक लगा दी गई

उत्तर : 1793 का चार्टर अधिनियम

सरल व्याख्या : भारत में कानून व्यवस्था और रेवेन्यू को सुधारने के लिए बिना सरकारी परमिट या लाइसेंस के शराब बेचना पूरी तरह गैर-कानूनी कर दिया गया।

प्रश्न : किस चार्टर के द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि गवर्नर जनरल बंगाल में अपनी अनुपस्थिति के समय परिषद के असैनिक सदस्य को अपने परिषद का उप-प्रधान नियुक्त कर सकता है

उत्तर : चार्टर अधिनियम, 1793

सरल व्याख्या : अगर गवर्नर जनरल किसी काम से बंगाल से बाहर (अनुपस्थित) जाता है, तो वह अपनी जगह परिषद के किसी भी सिविल (असैनिक) सदस्य को अस्थाई रूप से वाइस-प्रेसिडेंट या उप-प्रधान बना सकता है ताकि काम न रुके।

चार्टर एक्ट, 1813 (Charter Act of 1813)

यह भारत के इतिहास और शिक्षा के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण बदलाव वाला कानून था।

प्रश्न : भारत में ईसाई धर्म के प्रचार की अनुमति प्रदान की गई

उत्तर : चार्टर एक्ट, 1813 द्वारा

सरल व्याख्या : ब्रिटेन के ईसाई मिशनरियों को कानूनी रूप से भारत आने, यहाँ बसने और अपने धर्म का खुलकर प्रचार करने की पूरी आज़ादी इसी एक्ट से मिली।

प्रश्न : किस चार्टर के द्वारा भारत में शिक्षा पर ईस्ट इंडिया कंपनी को एक लाख रुपये वार्षिक खर्च करने का प्रावधान किया गया

उत्तर : चार्टर एक्ट, 1813

सरल व्याख्या : भारतीय लोगों की पढ़ाई-लिखाई और विज्ञान को बढ़ावा देने के लिए कंपनी को हर साल कम से कम ₹1 लाख खर्च करने का कानूनी आदेश दिया गया (यह भारत में सरकारी शिक्षा बजट की पहली शुरुआत थी)।

प्रश्न : किस चार्टर द्वारा सभी अंग्रेज व्यापारियों को भारत से व्यापार की छूट प्रदान करने का उपबंध किया गया था

उत्तर : 1813 के चार्टर द्वारा

सरल व्याख्या : इससे पहले सिर्फ ईस्ट इंडिया कंपनी ही भारत में व्यापार कर सकती थी। लेकिन इस कानून के बाद ब्रिटेन के बाकी सभी सामान्य व्यापारियों और कंपनियों के लिए भी भारत के दरवाज़े खोल दिए गए।

प्रश्न : किस अधिनियम के द्वारा ब्रिटिश संसद ने (चाय और चीन के साथ व्यापार को छोड़कर) ईस्ट इंडिया कंपनी के भारत के साथ व्यापारिक एकाधिकार को समाप्त कर दिया था

उत्तर : 1813 के चार्टर एक्ट द्वारा

सरल व्याख्या : कंपनी का भारत में अकेले व्यापार करने का राज (एकाधिकार) खत्म कर दिया गया। ब्रिटिश संसद ने सिर्फ दो चीज़ों पर कंपनी की छूट जारी रखी—पहला चाय का व्यापार और दूसरा चीन देश के साथ व्यापार। इन दोनों को छोड़कर बाकी सभी व्यापार सबके लिए खुल गए।

चार्टर एक्ट, 1833 (Charter Act of 1833)

यह अधिनियम भारत के पूरी तरह केंद्रीकरण (सारी ताकत एक जगह करने) और कंपनी को एक प्रशासनिक संस्था बनाने के लिए लाया गया था।

प्रश्न : भारत के प्रथम गवर्नर जनरल थे

उत्तर : लॉर्ड विलियम बैंटिक

सरल व्याख्या : इस नए कानून के तहत पूरे भारत देश का सबसे पहला गवर्नर जनरल बनने का गौरव लॉर्ड विलियम बैंटिक को मिला।

प्रश्न : वह चार्टर जिसने बम्बई तथा मद्रास की परिषद की विधि-निर्मात्री शक्ति समाप्त को कर दिया था

उत्तर : 1833 का चार्टर एक्ट

सरल व्याख्या : बम्बई (मुंबई) और मद्रास (चेन्नई) के गवर्नरों के पास जो अपने इलाकों के लिए खुद का कानून बनाने (विधि-निर्मात्री शक्ति) का हक था, उसे छीन लिया गया। अब पूरे भारत के लिए कानून बनाने की पूरी ताकत सिर्फ दिल्ली/कलकत्ता में बैठे गवर्नर जनरल को दे दी गई।

प्रश्न : ईस्ट इंडिया कंपनी के सभी वाणिज्यिक एकाधिकार कब समाप्त कर दिये गये

उत्तर : चार्टर एक्ट, 1833 द्वारा

सरल व्याख्या : 1813 के कानून में कंपनी के पास जो चाय और चीन देश के साथ व्यापार करने की आख़िरी छूट बची थी, उसे भी इस कानून के तहत पूरी तरह खत्म (वाणिज्यिक एकाधिकार समाप्त) कर दिया गया। अब कंपनी का काम सिर्फ भारत पर राज करना रह गया।

प्रश्न : चार्टर एक्ट, 1833 के किस धारा में यह उपबन्ध किया गया कि किसी भी भारतीय को मात्र धर्म, जन्म स्थान, वंश तथा वर्ण के आधार पर सरकारी सेवा के लिए अयोग्य नहीं माना जायेगा

उत्तर : धारा 87

सरल व्याख्या : इस कानून की धारा 87 (Section 87) में पहली बार यह अच्छी बात लिखी गई कि किसी भी भारतीय नागरिक को उसकी जाति, धर्म, रंग या जन्मस्थान के आधार पर किसी भी सरकारी नौकरी से बेदखल या अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा।

प्रश्न : किस अधिनियम द्वारा बंगाल के गवर्नर जनरल को सम्पूर्ण भारत का गवर्नर जनरल बना दिया गया

उत्तर : 1833 के चार्टर एक्ट द्वारा

सरल व्याख्या : यह बहुत बड़ा बदलाव था। जो पद पहले सिर्फ ‘बंगाल का गवर्नर जनरल’ कहलाता था, उसकी ताकतें बढ़ाकर उसे अब पूरे देश का यानी ‘सम्पूर्ण भारत का गवर्नर जनरल’ बना दिया गया।

प्रश्न : पहला विधि विशेषज्ञ किसे नियुक्त किया गया था

उत्तर : मैकाले को

सरल व्याख्या : इस नए पद पर चुने जाने वाले भारत के पहले कानून विशेषज्ञ लॉर्ड मैकाले (Lord Macaulay) थे, जिन्होंने आगे चलकर भारत की IPC (भारतीय दंड संहिता) का ढांचा तैयार किया।

प्रश्न : किस चार्टर एक्ट के द्वारा यह सुनिश्चित किया गया कि भारतीय क्षेत्रों का प्रशासन अब ब्रिटिश सम्राट के नाम से किया जायेगा

उत्तर : चार्टर एक्ट, 1833 द्वारा

सरल व्याख्या : यह साफ कर दिया गया कि ईस्ट इंडिया कंपनी भारत की मालकिन नहीं है, वह सिर्फ ब्रिटेन के राजा/रानी (ब्रिटिश सम्राट) के भरोसे और उनके नाम पर ही भारत का राज-काज (प्रशासन) संभाल रही है।

प्रश्न : गवर्नर जनरल की परिषद में एक विधि-विशेषज्ञ (चौथा सदस्य के रूप में) का प्रावधान किया गया था

उत्तर : चार्टर एक्ट, 1833 द्वारा

सरल व्याख्या : कानून बनाने की सलाह देने के लिए गवर्नर जनरल की टीम (परिषद) में एक नए और चौथे सदस्य के रूप में कानूनी जानकार यानी विधि-विशेषज्ञ (Law Member) का पद जोड़ा गया।

प्रश्न : किस चार्टर एक्ट के द्वारा भारत में दास-प्रथा को गैर-कानूनी घोषित कर दिया गया

उत्तर : चार्टर एक्ट, 1833

सरल व्याख्या : भारत में इंसानों को गुलाम बनाकर रखने की पुरानी कुप्रथा यानी दास-प्रथा (Slavery) को इसी कानून के तहत पूरी तरह गैर-कानूनी घोषित किया गया (जिसे बाद में 1843 में पूरी तरह मिटा दिया गया)।

चार्टर एक्ट, 1853 (Charter Act of 1853)

यह ईस्ट इंडिया कंपनी के समय लाया गया सबसे आखिरी चार्टर एक्ट था, जिसने भारत में संसद जैसी व्यवस्था की नींव रखी।

प्रश्न : 1853 के चार्टर एक्ट के द्वारा Civil सेवाओं के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं का शुभारंभ हुआ तथा इसे भारतीयों के लिए भी खोल दिया गया इसी संदर्भ में वर्ष 1854 में एक समिति की स्थापना हुई

उत्तर : मैकाले समिति

सरल व्याख्या : इससे पहले सिविल सेवा (IAS/ICS) के बड़े पदों पर अफसरों को सीधे मर्जी से रख लिया जाता था। लेकिन 1853 के कानून से यह नियम बना कि अब इसके लिए एक लिखित परीक्षा (Competitive Exam) होगी, जिसमें भारतीय भी बैठ सकेंगे। इस परीक्षा के नियम तय करने के लिए 1854 में ‘मैकाले समिति’ बनाई गई।

प्रश्न : किस राजलेख में बंगाल के प्रशासनिक कार्यों हेतु एक नये लेफ्टिनेंट गवर्नर की नियुक्ति का प्रावधान किया गया था

उत्तर : चार्टर एक्ट, 1853

सरल व्याख्या : चूंकि अब गवर्नर जनरल पूरे भारत का काम देखने लगा था, इसलिए बंगाल के स्थानीय काम-काज (प्रशासन) को संभालने के लिए एक अलग छोटे गवर्नर यानी लेफ्टिनेंट गवर्नर (Lieutenant Governor) का पद बनाया गया।

प्रश्न : भारतीय विधान परिषद में पहली बार क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का सिद्धांत आरंभ कब किया गया

उत्तर : 1853 के चार्टर के अनुसार स्थापित विधान परिषद में

सरल व्याख्या : कानून बनाने वाली इस परिषद में पहली बार स्थानीय या क्षेत्रीय लोगों (जैसे बम्बई, मद्रास, बंगाल और आगरा के प्रांतों से 4 सदस्यों) को शामिल किया गया, ताकि अलग-अलग क्षेत्रों की बात रखी जा सके।

प्रश्न : किस एक्ट द्वारा विधि निर्माण के लिए ‘भारतीय (केंद्रीय) विधान परिषद’ की स्थापना की गई

उत्तर : 1853 के चार्टर एक्ट द्वारा

सरल व्याख्या : देश के लिए कानून बनाने के लिए 12 सदस्यों की एक छोटी टीम बनाई गई जिसे ‘भारतीय विधान परिषद’ (Indian Legislative Council) कहा गया। यही आगे चलकर हमारी संसद (Parliament) बनी।

प्रश्न : पहली बार किस एक्ट के द्वारा गवर्नर जनरल के विधायी व प्रशासनिक कार्यों का विभाजन किया गया था

उत्तर : चार्टर एक्ट, 1853 द्वारा

सरल व्याख्या : गवर्नर जनरल के दो अलग-अलग कामों को अलग (विभाजन) कर दिया गया—देश के लिए नया कानून बनाना (विधायी कार्य) और बने हुए नियमों से राज-काज चलाना (प्रशासनिक कार्य)।

प्रश्न : किस अधिनियम द्वारा विधि सदस्य को गवर्नर जनरल की परिषद का पूर्ण सदस्य बना दिया गया

उत्तर : 1853 अधिनियम द्वारा

सरल व्याख्या : 1833 में जिस कानून विशेषज्ञ (विधि सदस्य) को सिर्फ सलाह देने के लिए अस्थाई रूप से रखा गया था, उसे अब इस 1853 के कानून के जरिए गवर्नर जनरल की टीम का एक पक्का और पूर्ण सदस्य (वोट डालने के अधिकार के साथ) बना दिया गया।

प्रश्न : किस राजलेख के द्वारा ब्रिटिश सरकार ने ईस्ट इंडिया कंपनी के निदेशकों से भारत में की जाने वाली नियुक्ति संबंधी शक्ति वापस ले ली

उत्तर : 1853 का चार्टर एक्ट

सरल व्याख्या : पहले कंपनी के निदेशक (मालिक) अपनी मर्जी से किसी को भी भारत में बड़ा अफसर नियुक्त कर देते थे। ब्रिटिश सरकार ने यह पुरानी सिफारिशी ताकत उनसे हमेशा के लिए छीन ली।


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