भारत सरकार अधिनियम, 1919 (मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार,1919)

भारत सरकार अधिनियम, 1919 (Government of India Act, 1919)

इसे इतिहास में ‘मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार’ कहा जाता है। यह कानून प्रांतों में ‘द्वैध शासन’ (Double Government) लागू करने और केंद्र में दो सदनों वाली संसद (लोकसभा व राज्यसभा) बनाने के लिए जाना जाता है।

प्रश्न :  भारत सरकार अधिनियम, 1919 की आधार सामग्री थी

उत्तर : मांटेग्यू चेम्सफोर्ड रिपोर्ट (1918)

सरल व्याख्या : उस समय के भारत सचिव ‘मोंटेग्यू’ और वायसराय ‘लॉर्ड चेम्सफोर्ड’ ने मिलकर 1918 में जो राजनीतिक सुधारों की रिपोर्ट तैयार की थी, उसी के आधार पर यह 1919 का नया कानून तैयार किया गया था।

प्रश्न :  भारत सरकार अधिनियम, 1919 का उद्देश्य क्या था

उत्तर : भारत में एक उत्तरदायी शासन की स्थापना करना

सरल व्याख्या : इस कानून का मुख्य लक्ष्य या उद्देश्य यह दिखाया गया था कि ब्रिटिश सरकार अब धीरे-धीरे भारत के लोगों को शासन सौंपकर एक ज़िम्मेदार और जवाबदेह सरकार (उत्तरदायी शासन) बनाना चाहती है।

भारत सरकार अधिनियम, 1919 (प्रांतों में द्वैध शासन और शक्ति विभाजन)

यह हिस्सा मुख्य रूप से राज्यों में लागू की गई दोहरी शासन व्यवस्था (द्वैध शासन) और केंद्र-राज्यों के बीच ताकतों के बंटवारे के नियमों को बताता है।

प्रश्न :  भारत सरकार अधिनियम, 1919 की प्रस्तावना में समावेश था - 'अगस्त घोषणा' के मूल सिद्धांतों का

सरल व्याख्या : इस कानून की शुरुआत (प्रस्तावना) में वही बातें लिखी गई थीं जो ब्रिटिश सरकार ने 20 अगस्त 1917 को ‘अगस्त घोषणा’ में कही थीं—कि वे भारत में धीरे-धीरे ज़िम्मेदार शासन लाएंगे।

प्रश्न :  ब्रिटिश संसद में भारत सरकार अधिनियम, 1919 कब पारित किया गया

उत्तर : दिसम्बर, 1919 में

सरल व्याख्या : ब्रिटेन की संसद ने इस पूरे ऐतिहासिक कानून को साल 1919 के आखिरी महीने यानी दिसम्बर 1919 में पास (पारित) कर दिया था।

प्रश्न :  भारत सरकार अधिनियम, 1919 लागू हुआ था

उत्तर : 3 जनवरी, 1921 को

सरल व्याख्या : यह कानून 1919 में पास जरूर हुआ था, लेकिन इसे भारत देश में पूरी तरह से 3 जनवरी 1921 से काम में (लागू) लाया गया।

प्रश्न :  भारत सरकार अधिनियम 1919 ने प्रांतों में उत्तरदायी सरकार की स्थापना के लिए किस प्रणाली को अपनाया था

उत्तर : द्वैध शासन (Dyarchy)

सरल व्याख्या : इसे ‘दोहरा शासन’ कहते हैं। इसके तहत राज्यों के मंत्रियों को काम करने की आज़ादी तो दी गई, लेकिन मुख्य और बड़े विभाग अभी भी ब्रिटिश अफसरों के पास ही रखे गए।

प्रश्न :  1919 अधिनियम के अन्तर्गत प्रान्तीय कार्यकारिणी परिषद की शक्तियों का विभाजन कितने भागों में किया गया था

उत्तर : दो भागों में (आरक्षित तथा हस्तांतरित विषय)

सरल व्याख्या : राज्य सरकार के सभी कामों और विभागों को दो हिस्सों में बांट (विभाजन) दिया गया था—पहले ‘आरक्षित विषय’ (Reserved) और दूसरे ‘हस्तांतरित विषय’ (Transferred)

प्रश्न :  हस्तांतरित विषयों पर राज्य के गवर्नर किसकी सलाह पर कार्य करते थे

उत्तर : मंत्रियों की सलाह पर

सरल व्याख्या : ‘हस्तांतरित विषयों’ में कम महत्वपूर्ण विभाग (जैसे—शिक्षा, स्वास्थ्य, स्थानीय चुनाव) आते थे। इन पर राज्य का गवर्नर उन भारतीय नेताओं या मंत्रियों की सलाह से काम करता था जिन्हें जनता ने चुना था।

प्रश्न :  आरक्षित विषयों पर राज्य के गवर्नर किसकी सलाह पर कार्य करते थे

उत्तर : कार्यकारी परिषद की सलाह पर

सरल व्याख्या : ‘आरक्षित विषयों’ में सबसे मुख्य और मलाईदार विभाग (जैसे—पुलिस, जेल, न्याय, पैसा/वित्त) आते थे। इन पर गवर्नर भारतीय मंत्रियों की बात नहीं सुनता था, वह सिर्फ अपने खास ब्रिटिश अफसरों की टीम (कार्यकारी परिषद) की सलाह से फैसले लेता था।

प्रश्न :  पहली बार किस अधिनियम के द्वारा केन्द्रीय व प्रान्तीय विषयों में विभाजन किया गया था

उत्तर : भारत सरकार अधिनियम 1919 द्वारा

सरल व्याख्या : देश के इतिहास में पहली बार यह साफ-साफ लिस्ट बनाई गई कि कौन से कामों पर सिर्फ केंद्र सरकार कानून बनाएगी और कौन से कामों पर सिर्फ राज्य सरकारें (प्रांत) काम करेंगी।

प्रश्न :  1919 के अधिनियम के तहत प्रान्तीय तथा केन्द्रीय सरकार के बीच शक्ति विभाजन किया गया था

उत्तर : न्यायगमन नियमों के अनुसार

सरल व्याख्या : केंद्र और राज्यों के बीच लड़ाई न हो, इसलिए ताकतों का यह बंटवारा विशेष सरकारी नियमों (Devolution Rules / न्यायगमन नियम) के तहत लिखित रूप में किया गया था।

प्रश्न :  भारतीय संविधान में सरकार को एकात्मक से संघात्मक में परिवर्तित करने हेतु पृष्ठभूमि तैयार करने वाला कानून कौन-सा था

उत्तर : भारत सरकार अधिनियम 1919

सरल व्याख्या : हमारा आज का जो संविधान है जहाँ केंद्र और राज्य मिलकर काम करते हैं (संघात्मक सरकार), उसकी शुरुआती रूपरेखा या पृष्ठभूमि इसी 1919 के कानून से तैयार हुई थी।

प्रश्न :  1919 के अधिनियम के अधीन केन्द्रीय तथा प्रान्तीय सरकारों के मध्य विवाद की स्थिति में मान्य मत किसका होता था

उत्तर : केन्द्र सरकार का

सरल व्याख्या : यदि किसी कानून या विषय को लेकर केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच कोई झगड़ा (विवाद) हो जाता था, तो केंद्र सरकार की बात को ही अंतिम और सही (मान्य मत) माना जाता था।

प्रश्न :  1919 के अधिनियम का झुकाव किस तरफ था

उत्तर : संघात्मक सरकार की तरफ

सरल व्याख्या : यह कानून पूरी ताकत एक जगह रखने के बजाय राज्यों को थोड़ी आज़ादी देकर एक मिले-जुले देश यानी संघात्मक ढांचे की तरफ बढ़ रहा था।

प्रश्न :  भारत सरकार अधिनियम, 1919 के अनुसार प्रान्तीय स्तर पर विषयों में भ्रम की स्थिति में किसका स्पष्टीकरण, मत एवं निर्णय अंतिम होता था

उत्तर : गवर्नर का

सरल व्याख्या : अगर राज्यों में इस बात को लेकर भ्रम या कन्फ्यूजन हो जाए कि कोई काम आरक्षित विभाग में आता है या हस्तांतरित विभाग में, तो उस राज्य के गवर्नर का फैसला ही आखिरी (अंतिम) माना जाता था।

प्रश्न :  भारत में गवर्नर के अधीन कितने प्रांतों में द्वैध शासन प्रणाली लागू की गयी थी

उत्तर : 9 प्रांतों में

सरल व्याख्या : भारत के कुल 9 बड़े राज्यों (प्रांतों)—जैसे बंगाल, बम्बई, मद्रास, पंजाब, उत्तर प्रदेश (संयुक्त प्रांत) आदि में यह दोहरी शासन व्यवस्था शुरू की गई थी।

प्रश्न :  भारत सरकार अधिनियम, 1919 के अधीन प्रांतों में स्थापित होने वाली विधान परिषदें किस प्रकार की थीं

उत्तर : एकसदनीय

सरल व्याख्या : राज्यों के स्तर पर केवल एक ही सदन या एक ही व्यवस्थापिका सभा होती थी जिसे विधान परिषद कहा जाता था। वहां आज की तरह दो सदन (विधानसभा और विधान परिषद दोनों) नहीं होते थे।

प्रश्न :  किस अधिनियम के द्वारा प्रान्तीय विधान सभाओं के लिए पहली बार प्रत्यक्ष निर्वाचन की प्रणाली अपनायी गयी थी

उत्तर : 1919 का अधिनियम द्वारा

सरल व्याख्या : यह बहुत बड़ा सुधार था। पहली बार राज्यों के चुनावों में जनता को सीधे खुद वोट डालकर (प्रत्यक्ष निर्वाचन) अपने पसंदीदा नेता को चुनने का मौका मिला (हालांकि वोट देने का हक सिर्फ अमीर और पढ़े-लिखे लोगों को ही था)।

प्रश्न :  1919 के अधिनियम के अंतर्गत प्रांतों में पृथक निर्वाचन क्षेत्रों की व्यवस्था किन वर्गों के लिए की गयी थी

उत्तर : सिक्खों, भारतीय ईसाई, यूरोपीय व आंगल भारतीयों के लिए

सरल व्याख्या : अंग्रेजों ने ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति को और आगे बढ़ाया। 1909 में जो अलग वोटिंग (पृथक निर्वाचन) सिर्फ मुसलमानों को दी गई थी, उसे अब बढ़ाकर सिखों, ईसाईयों और एंग्लो-इंडियंस पर भी लागू कर दिया गया ताकि भारतीय आपस में बंट जाएं।

भारत सरकार अधिनियम, 1919 (केंद्रीय संसद और बजट प्रक्रिया)

यह हिस्सा प्रांतों के शासन के अंतिम नियमों, वायसराय की ताकतों और केंद्र में पहली बार दो सदनों वाली संसद (लोकसभा व राज्यसभा) के गठन के बारे में बताता है।

प्रश्न :  1919 के अधिनियम के द्वारा प्रान्तीय विधान परिषदों में दलित वर्ग, श्रमिक आदि को प्रतिनिधित्व देने के लिए व्यवस्था की गयी थी

उत्तर : मनोनयन के द्वारा

सरल व्याख्या : समाज के गरीब, पिछड़े (दलित) और मजदूर (श्रमिक) वर्गों के नेताओं को चुनाव के बजाय सीधे सरकार द्वारा नामजद करके (मनोनयन / Nomination) विधानसभा में सीटें दी जाती थीं ताकि उनकी बात भी रखी जा सके।

प्रश्न :  भारत सरकार अधिनियम, 1919 में प्रान्तीय विधान सभा के निर्वाचन हेतु मतदान की शर्तें किस प्रकार निर्धारित की गयी थी

उत्तर : अलग-अलग प्रान्तों के लिए अलग-अलग

सरल व्याख्या : राज्यों के चुनाव में कौन व्यक्ति वोट डाल सकता है और कौन नहीं (जैसे कितनी संपत्ति या पढ़ाई होनी चाहिए), इसके नियम पूरे देश में एक जैसे नहीं थे। हर राज्य (अलग-अलग प्रान्तों) की परिस्थितियों के हिसाब से अलग नियम बनाए गए थे।

प्रश्न :  प्रान्तीय विधानमण्डलों को प्रान्तीय विषयों पर विधि बनाने का अधिकार किस अधिनियम के द्वारा दिया गया था

उत्तर : भारत सरकार अधिनियम, 1919 में

सरल व्याख्या : राज्यों की विधानसभाओं को यह पक्का कानूनी हक मिल गया कि वे राज्य सूची के स्थानीय विषयों (जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, सफाई) पर अपनी मर्जी से खुद नया कानून (विधि) बना सकें।

प्रश्न :  किस अधिनियम द्वारा प्रतिवर्ष विधानमण्डल के समक्ष बजट प्रस्तुत किया जाना अनिवार्य किया गया था

उत्तर : भारत सरकार अधिनियम, 1919 के द्वारा

सरल व्याख्या : यह बहुत ज़रूरी प्रशासनिक नियम बना। सरकार के लिए यह कानूनी रूप से ज़रूरी (अनिवार्य) कर दिया गया कि वह हर साल जनता की कमाई और खर्चे का पूरा हिसाब यानी बजट विधानसभा के सामने पेश करे।

प्रश्न :  भारत सरकार अधिनियम, 1919 द्वारा प्रान्तीय विधानसभा का कार्यकाल निर्धारित किया गया था –

उत्तर : 3 वर्ष

सरल व्याख्या : इस कानून के तहत राज्यों की विधानसभाओं (प्रांतीय विधानसभा) का समय या जीवन केवल 3 साल तय किया गया था (आज यह समय 5 साल का होता है)।

प्रश्न :  1919 के अधिनियम के अन्तर्गत प्रान्तीय विधानसभा का सत्र बुलाने, स्थगित करने अथवा भंग करने की शक्ति निहित थी

उत्तर : गवर्नर में

सरल व्याख्या : राज्य के गवर्नर को यह पूरी ताकत दी गई थी कि वह जब चाहे विधानसभा की बैठक (सत्र) बुला सके, उसे कुछ समय के लिए रोक (स्थगित) सके या समय से पहले भी पूरी विधानसभा को खत्म (भंग) कर सके।

प्रश्न :  किस प्रांत में द्वैध शासन प्रणाली ने संतोषजनक ढंग से कार्य किया था

उत्तर : पंजाब

सरल व्याख्या : अंग्रेजों द्वारा राज्यों में लागू की गई दोहरी शासन व्यवस्था (द्वैध शासन) पूरे देश में फेल साबित हुई थी, लेकिन केवल पंजाब राज्य में इसने थोड़े ठीक-ठाक और संतोषजनक तरीके से काम किया था।

प्रश्न :  'मंत्री गवर्नर के प्रसाद पर्यन्त ही पद पर रह सकेगा' यह व्यवस्था किस अधिनियम द्वारा दी गयी थी

उत्तर : भारत सरकार अधिनियम, 1919 द्वारा

सरल व्याख्या : जो भारतीय नेता चुनाव जीतकर मंत्री बनते थे, वे अपनी कुर्सी पर तभी तक बने रह सकते थे जब तक राज्य का गवर्नर चाहे। गवर्नर जब चाहे किसी भी मंत्री को पद से हटा सकता था।

प्रश्न :  भारत सरकार अधिनियम, 1919 के अंतर्गत गवर्नर द्वारा अध्यादेश जारी किये जाने हेतु वांछित शर्त क्या थी

उत्तर : वायसराय की अनुमति

सरल व्याख्या : यदि राज्य का गवर्नर आपातकाल में सीधे कोई अस्थाई कानून (अध्यादेश / Ordinance) जारी करना चाहता था, तो उसके लिए देश के सबसे बड़े अफसर यानी वायसराय की पहले से मंजूरी (अनुमति) लेना ज़रूरी था।

प्रश्न :  किस अधिनियम द्वारा केन्द्र में प्रथम बार द्विसदनीय विधानसभा स्थापित की गयी थी

उत्तर : 1919 के अधिनियम द्वारा

सरल व्याख्या : यह हमारी आज की संसद की शुरुआत थी। केंद्र सरकार के स्तर पर पहली बार दो सदनों वाली संसद (द्विसदनीय विधानसभा) बनाई गई, जिसे केंद्रीय विधानसभा और राज्य परिषद कहा गया।

प्रश्न :  वह अधिनियम जिसके द्वारा प्रथमतः राज्यसभा स्थापित की गयी थी

उत्तर : भारत सरकार अधिनियम, 1919 द्वारा

सरल व्याख्या : हमारे देश में आज जो संसद का ऊपरी सदन यानी ‘राज्यसभा’ (Council of State) है, उसकी पहली बार स्थापना इसी 1919 के कानून के ज़रिए की गई थी।

प्रश्न :  1919 के अधिनियम द्वारा स्थापित राज्यसभा का कार्यकाल निश्चित किया गया था

उत्तर : 5 वर्ष

सरल व्याख्या : उस समय केंद्र में बनी इस नई राज्यसभा (राज्य परिषद) के काम करने का समय या कार्यकाल कुल 5 साल का तय किया गया था।

प्रश्न :  1919 के अधिनियम के अनुसार विधानसभा में कौन-सा प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाना अनिवार्य था

उत्तर : कर वृद्धि विषयक सभी प्रस्ताव (आर्थिक बिल)

सरल व्याख्या : सरकार अगर जनता पर कोई भी नया टैक्स लगाना चाहती थी या पुराना टैक्स बढ़ाना (कर वृद्धि) चाहती थी, तो उस पैसे से जुड़े बिल (आर्थिक बिल) को पास कराने के लिए संसद के सामने रखना एकदम ज़रूरी था।

प्रश्न :  1919 के अधिनियम द्वारा भारत सचिव की परिषद की संख्या पुनर्निर्धारित की गयी थी

उत्तर : न्यूनतम 8 तथा अधिकतम 12

सरल व्याख्या : ब्रिटेन में बैठे भारत सचिव की मदद करने वाली टीम (जिसमें पहले 15 सदस्य थे) की संख्या को बदलकर कम से कम 8 और ज़्यादा से ज़्यादा 12 तय कर दिया गया।

प्रश्न :  1919 के अधिनियम द्वारा गवर्नर जनरल की कार्यकारिणी में भारतीय सदस्यों की संख्या पुनर्निर्धारित की गयी थी

उत्तर : 3 (2 से बढ़ाकर)

सरल व्याख्या : वायसराय/गवर्नर जनरल की मुख्य प्रशासनिक टीम (कार्यकारिणी) में भारतीय नेताओं की ताकत बढ़ाई गई। पहले इसमें केवल 2 भारतीय होते थे, जिसे इस कानून के बाद बढ़ाकर कुल 3 भारतीय सदस्य कर दिया गया (कुल 6 सदस्यों में से)।

भारत सरकार अधिनियम, 1919 (विभाजन, आयोग और आलोचना)

प्रश्न :  1919 के अधिनियम के अनुसार किन विषयों पर भारतीय परिषद (Indian council) का मत अतिआवश्यक था

उत्तर : आय-व्यय तथा अखिल भारतीय सेवा संबंधी नियम

सरल व्याख्या : ब्रिटेन में बैठी भारत सचिव की टीम (भारतीय परिषद) की रजामंदी दो सबसे ज़रूरी मामलों में एकदम अनिवार्य (अतिआवश्यक) थी—पहला देश का बजट (आय-व्यय) और दूसरा IAS/ICS (अखिल भारतीय सेवा) जैसी बड़ी नौकरियों के नियम।

प्रश्न :  किस अधिनियम द्वारा लंदन में भारत के उच्चायुक्त के कार्यालय का सृजन किया गया

उत्तर : भारत सरकार अधिनियम,1919 के द्वारा

सरल व्याख्या : लंदन (ब्रिटेन) में भारत सरकार की तरफ से बातचीत और व्यापारिक काम संभालने के लिए एक नए राजदूत यानी ‘उच्चायुक्त’ (High Commissioner) का बड़ा दफ्तर (कार्यालय) इसी कानून से बनाया गया था।

प्रश्न :  किस अधिनियम द्वारा प्रावधान किया गया कि केन्द्रीय बजट एवं प्रान्तीय बजट अलग-अलग पेश होंगे

उत्तर : भारत सरकार अधिनियम, 1919 द्वारा

सरल व्याख्या : यह बहुत बड़ा प्रशासनिक बदलाव था। पहली बार यह नियम बना कि पूरे देश का मुख्य बजट (केंद्रीय बजट) और राज्यों का बजट (प्रान्तीय बजट) एक साथ नहीं, बल्कि अलग-अलग पेश किया जाएगा।

प्रश्न :  किस अधिनियम के द्वारा पहली बार एक 'लोक सेवा आयोग' की स्थापना की गई थी

उत्तर : भारत सरकार अधिनियम, 1919 द्वारा

सरल व्याख्या : भारत में सिविल सेवा (IAS/IPS) जैसी बड़ी सरकारी नौकरियों की परीक्षा निष्पक्ष कराने के लिए एक केंद्रीय बोर्ड यानी ‘लोक सेवा आयोग’ (Public Service Commission) बनाने का पहला कानून इसी एक्ट में आया था (जिसके तहत आगे चलकर 1926 में आयोग बना)।

प्रश्न :  भारत सरकार अधिनियम, 1919 के अधीन केन्द्रीय सरकार में विहित विषय थे

उत्तर : नाविक, सेना, बाह्य संबंध, भारतीय राजाओं से संबंध, रेलवे, डाक तथा तार, मुद्रा, ऋण-आय के साधन, फौजदारी तथा दीवानी कानून, अखिल भारतीय सेवाएं आदि।

सरल व्याख्या : केंद्र सरकार (वायसराय और उनकी टीम) को पूरे देश से जुड़े सबसे बड़े और महत्वपूर्ण काम सौंपे गए थे—जैसे सेना और नौसेना (नाविक), विदेश नीति (बाह्य संबंध), राजा-महाराजाओं से बातचीत, रेलवे, पोस्ट ऑफिस (डाक-तार), देश का पैसा (मुद्रा), लोन लेना, और मुख्य अदालती कानून।

प्रश्न :  भारत सरकार अधिनियम, 1919 के अधीन प्रान्तीय सरकार में निहित विषय थे

उत्तर : स्थानीय स्वशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, बिक्रीकर, सहकारी समितियां, भूमिकर, प्रशासन, सिंचाई, न्याय, पुलिस तथा कारागृह आदि।

सरल व्याख्या : राज्य सरकारों (प्रांतों) को स्थानीय विकास से जुड़े विभाग दिए गए थे—जैसे पंचायत व नगर पालिका (स्थानीय स्वशासन), स्कूल-कॉलेज (शिक्षा), अस्पताल (स्वास्थ्य), खेती (कृषि), को-ऑपरेटिव सोसायटियाँ, जमीन का लगान (भूमिकर), नहरें (सिंचाई), कोर्ट, पुलिस और जेल (कारागृह)।

प्रश्न :  1919 के अधिनियम का किन लोगों द्वारा स्वागत किया गया था

उत्तर : कांग्रेस के मध्यमार्गियों द्वारा

सरल व्याख्या : कांग्रेस के जो नरम दल के नेता (मध्यमार्गी) थे, उन्होंने इस कानून का स्वागत किया क्योंकि उनका मानना था कि इसके जरिए भारतीयों को पहली बार शासन में कुछ अच्छी हिस्सेदारी मिल रही है।

प्रश्न :  'मूडीमैन समिति' किस लिए गठित की गयी थी

उत्तर : 1919 के अधिनियम की जांच करने हेतु

सरल व्याख्या : 1919 के कानून के तहत राज्यों में जो दोहरी शासन व्यवस्था (द्वैध शासन) शुरू की गई थी, वह सही से काम कर रही है या नहीं, इसी की कमियों को जांचने के लिए ब्रिटिश सरकार ने 1924 में ‘मूडीमैन समिति’ बनाई थी।

प्रश्न :  'भारत का गवर्नर जनरल राज भी करता है, और शासन भी' यह कथन संबंधित है

उत्तर : 1919 के अधिनियम के द्वारा गवर्नर जनरल को दिये गये विशेषाधिकारों के संदर्भ में

सरल व्याख्या : इस कानून में वायसराय (गवर्नर जनरल) को इतनी ज्यादा वीटो पावर और विशेष अधिकार दे दिए गए थे कि वह संसद के बिना भी अपनी मर्जी से कोई भी कानून पास कर सकता था, इसीलिए यह कहावत बनी कि वह राजा की तरह राज भी करता है और सरकार की तरह शासन भी।

प्रश्न :  किसने कहा था कि 1919 का अधिनियम भारतीयों के लिए बेड़ियों का नया जाल था

उत्तर : सुभाष चन्द्र बोस ने

सरल व्याख्या : नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने इस कानून की कड़ी निंदा (आलोचना) की थी। उनका मानना था कि यह कानून आज़ादी देने के नाम पर भारतीयों को और ज्यादा गुलाम बनाए रखने का अंग्रेजों का एक नया कानूनी फंदा (बेड़ियों का जाल) है।

प्रश्न :  किसका कथन है कि चेम्सफोर्ड सुधार भारत के आर्थिक शोषण तथा उस पर नियंत्रण बनाये रखने की प्रक्रिया के ही अंग थे

उत्तर : महात्मा गांधी का

सरल व्याख्या : महात्मा गांधी का कहना था कि यह मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड कानून सिर्फ दिखावा है। इसका असली मकसद भारत की दौलत को लूटना (आर्थिक शोषण) और देश पर अंग्रेजों का कब्जा पक्का रखना ही है।


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